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कनहर पर अड़ा यूपी ,छत्तीसगढ़ सरकार का अनुरोध खारिज | Patrika


26.05.2015 | http://www.patrika.com/news/raipur/raipur-kanhar-adamant-up-chhattisgarh-government-rejects-request-1041623/

 

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 अप्रैल को पत्र लिखकर यूपी से सर्वेक्षण की प्रक्रिया और पुनर्वास कार्य पूरा होने तक बाँध का निर्माण रोकने को कहा था। 

 

रायपुर. उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ सीमा पर बनाए जा रहे कनहर बाँध को लेकर यूपी सरकार ने अपने कदम पीछे खींचने से इनकार कर दिया है। यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विवेक ढांड को भेजे गए जवाबी पत्र में कहा है कि हम कनहर बाँध के निर्माण में अतर्राज्यीय समझौतों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं । गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 अप्रैल को पत्र लिखकर यूपी से सर्वेक्षण की प्रक्रिया और पुनर्वास कार्य पूरा होने तक बाँध का निर्माण रोकने को कहा था।

इस बीच ताजा घटनाक्रम में छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग ने बाँध के डूब क्षेत्रों के सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है । इस नए सर्वे में राज्य सरकार के खुद के दावे के विपरीत चार ग्रामसभाओं की जगह 6 ग्रामसभाओं के डूबने की बात सामने आई है। राज्य के जलसंसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता एच आर कुटारे कहते हैं अगर यूपी सरकार जिद्द पर अड़ी रहती है तो हमने न्यायालय जाने का विकल्प खुला रखा है । गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव आगामी एक जून को कनहर में कंक्रीट के काम का उदघाटन करने वाले हैं।

 

यूपी की वादा खिलाफी पर छत्तीसगढ़ की खामोशी

 

1982 में हुए कनहर समझौते के अनुरूप बाँध के निर्माण के बाद जलाशय के जल के एक बड़े हिस्से को छत्तीसगढ़ को दिया जाना था ,लेकिन अब यूपी अपने वादे से पीछे हट रहा है । उधर झारखंड ने जब संसद के पिछले सत्र में कनहर के निर्माण को लेकर हल्ला बोला और झारखंड जल संसाधन विभाग ने न्यायालय जाने की तैयारी शुरू कर दी,तो यूपी झारखंड के साथ जल के बटवारे पर तैयार हो गया । यूपी में कनहर निर्माण प्रखंड के मुख्य अभियंता के बी एस द्विवेदी कह्ते हैं हम कनहर के दायें बेसिन से 1.6 किलोमीटर की नहर निकाल कर झारखंड को पानी देगे।

 

क्या कहता है सर्वेक्षण

 

राज्य सरकार द्वारा विगत 28 अप्रैल को यूपी सरकार को लिखे गए पत्र में किये गए दावों के विपरीत ताजा सर्वेक्षण में 6 ग्राम सभाओं के डूबने की बात सामने आई है। छत्तीसगढ़ जल ससाधन विभाग का कहनाहै कि डूब में राजस्व ,निजी भूमि के अलावा वन भूमि भी है,हांलाकि बाढ़ के दौरान यह डूब बढेगा । छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि सर्वेक्षण के नतीजों से केवल 53 कृषकों के प्रभावित होने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि अगर मोटे तौर पर देखा जाए तो मुआवजे की कुल राशि भूमि मूल्य के सहित तकऱीबन 50 करोड़ रूपए के आस पास पड़ेगी।

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