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किसानों के जी का जंजाल बने घड़रोज- जागरण


06 02 2012 6mrz9c c 2

जिगना(मीरजापुर) : किसानों की खेती के लिए घड़रोज (नीलगाय) अभिशाप बनते जा रहे हैं। किसान चना, मटर, गन्ना आदि फसलों की खेती करना पूरी तरह बंद कर दिया है। अरहर और गेहूं की फसल को चौपट कर दे रही है। अधिकांश स्थानों पर बिजूका (धोंख) बनाये जाने के बाद भी निडर होकर दौड़ लगाते रहती हैं।गंगा की तराई के अलावा अन्य क्षेत्रों में इन दिनों नीलगाय से किसान पूरी तरह परास्त हो गये हैं। जिम्मेदार वन विभाग भी इन जानवरों को पकड़ने अथवा मारने की कोई व्यवस्था नहीं कर रहा है। किसानों का कहना है कि पहले तो अरहर खेत या बगीचे में रहती थीं। अब तो गेहूं की फसल को भी दिन में खा जा रहे हैं। बताया जाता है कि गेहूं की फसल को खा लें तो ठीक है लेकिन उसी खेत में कई चक्कर दौड़ लगाने से पूरी तरह नष्ट हो जाता है। आलू की फसल को भी नष्ट कर दे रही हैं। खास बात तो यह है किसानों ने अरहर, चना मटर, गन्ना जैसी प्रमुख फसलों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। बताते हैं कि मटर, गन्ना की खेती से किसान मालामाल हो जाते थे लेकिन गन्ना, मटर गायब होने से किसानों को खेती से बहुत बड़ा झटका लगा है। क्षेत्र के छानबे, गौरा, दुगौली, नगवासी, मिसिरपुर, गोंगांव, काशीसरपती, बजटा, नीवगहरवार, रैपुरी, निफरा, जोपा, तिलई, बबुरा आदि गांव में सैकड़ों की संख्या में झुंड बनाकर फसल को चौपट कर देती हैं। यह झुंड जिस किसान के खेत में घुस गया तो पूरी फसल ही नष्ट कर देती हैं। किसान सुरक्षा की दृष्टि बिजूका बनाये हुए हैं। नीलगाय इतनी निडर हो गयी हैं कि बिजूका को पैर से मारकर गिरा देती हैं। कुत्तों को तो दौड़ा लेती है। वन विभाग इस पर पूरी तरह सुस्त पड़ा हुआ है। उनका कहना है कि नीलगाय को मारने के लिए आदेश हो गया। उपजिलाधिकारी और खण्ड विकास अधिकारी से परमिट लेने के बाद कोई भी आखेट कर सकता है।

स्रोत-https://www.jagran.com/uttar-pradesh/mirzapur-8864340.html

 

Author: Gulam MustafaEmail: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.

Tags: Human-Wildlife Interaction, Nilgai

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