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विंध्य के वन पर भू-माफियाओं का क़हर, विलुप्त हो रहे दुर्लभ वन्य प्राणी : बेमतलब सरकार, मतलबी प्रशासन | Chauthi Duniya


Santosh Giri | Chauthi Duniya | 26 July, 2017 | http://www.chauthiduniya.com/2017/07/vidhyans-ke-van-per-bhoo-mafiaon-ka-kehar.html

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विंध्य क्षेत्र की हरी-भरी वादियों, पहाड़ों पर आच्छादित वन और वन्य प्राणियों को भू-माफियाओं से भीषण खतरा है. जंगल तेजी से सिमटते जा रहे हैं और जंगल में रहने वाले वन्य जीव विलुप्त हो रहे हैं. जंगल और पहाड़ पर मड़हा डाल कर रहने वाले कोल जैसी वनवासी जनजातियों को प्रशासन जंगल से खदेड़ने का काम कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ भू-माफियाओं को जंगल काट कर वन भूमि पर कंक्रीट की इमारतें खड़ी करने की प्रशासन से इजाजत मिल रही है. परिणाम ये हुआ है कि जंगल की हरियाली काट कर प्लॉटिंग करने का काम तेज गति से हो रहा है. शासन, प्रशासन, वन विभाग और राजस्व विभाग आंखें मूंदे हैं.

मिर्जापुर जनपद का मड़िहान और हलिया का वन क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सबसे बेहतरीन उष्ण-कटिबंधीय पतझड़ वनों के लिए जाना जाता है. यहां की जैव विविधता असाधारण एवं लोकप्रिय है. मिर्जापुर के मड़िहान वन क्षेत्र में स्लॉथ, भालू, तेंदुआ, गिद्ध (अब तो विलुप्त हो चुके), चिंकारा, काला हिरन, गोह, मगरमच्छ, जंगली सुअर, अजगर आदि वन्य जीवों का वास है. इसी प्रकार हलिया वन क्षेत्र में तेंदुआ, चिंकारा, हिरन, अजगर, जंगली सुअर, आदि जीवों का ठौर है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इन वनों में विध्वंसक परिर्वतन हो रहा है. इससे जंगल के अस्तित्व पर ग्रहण लगता जा रहा है. जंगलों को खत्म कर तेजी के साथ हो रहे अवैध कब्जे, वन की कटाई और कंक्रीट के निर्माण कार्यों के साथ-साथ अवैध पत्थर के अंधाधुंध खनन से स्थिति चिंताजनक होती जा रही है.

प्रशासन बेशर्मी से चुप है. जंगल के तेज दोहन के कारण ही मड़िहान के जंगलों से भटक कर एक बाघ पड़री क्षेत्र के गांवों की ओर आ गया था. इसी प्रकार 16 जून 2017 को मड़िहान के जंगल से पीने के पानी के लिए तड़पता हुआ एक भालू सुबह के वक्त नकटी मिश्रोली गांव में घुस गया था. जिससे पूरे गांव में खलबली मच गई थी. काफी मशक्कत के बाद वन विभाग और पुलिस टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से उसे पकड़ कर फिर जंगल में छोड़ा. मड़िहान का जंगल भालू के लिए प्रसिद्ध है. वन विभाग के रिकार्ड में भी जंगल में भालुओं की अच्छी खासी संख्या दिखाई जाती है. भीषण गर्मी में वन्य जीवों के समक्ष पीने के पानी का गंभीर संकट है. दो महीने पहले भी मड़िहान जंगल के नकटी मिश्रौली गांव से लगे गांव में बाघ दिखा था. वन विभाग और कानपुर चिड़ियाघर की टीम दो दिनों तक उस बाघ की तलाश में जुटी रही, लेकिन नाकाम रही.

जंगल की बेतहाशा कटाई से विंध्यक्षेत्र में वन्य जीवों और निकटवर्ती ग्रामीणों में टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. आए दिन तेंदुआ, भालू, मगरमच्छ, बाघ, लकड़बग्घा जैसे वन्य जीवों से स्थानीय लोगों का आमना-सामना हो जाता है. कई बार स्थानीय लोगों के हाथों वन्य जीव मारे भी जाते हैं. वन्य जीवों की साल दर साल घटती संख्या चिंताजनक है. वन विभाग मिर्जापुर आंकड़े देखें, तो वन्य जीवों की तेजी से घटती संख्या दुखद एहसास कराती है. साल 2011 में मिर्जापुर के जंगलों में 211 स्लॉथ बेयर (भालू की एक भारतीय प्रजाति), 277 चिंकारा, 129 काला हिरण और 248 सांभर थे. साल 2013 में स्लॉथ बेयर की संख्या घटकर 114 रह गई. इसी तरह 117 चिंकारा, 82 काला हिरण और 88 सांभर बचे.

पर्यावरण एवं वन्यजीवों के संरक्षण के लिए पिछले सात वर्षों से कार्य कर रही संस्था ‘विंध्य बचाओ अभियान’ ने अप्रैल 2017 में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिर्जापुर जिले के मड़िहान वन क्षेत्र में किए गए अवैध कब्जों को हटाए जाने को लेकर एक ज्ञापन सौंपा था. संस्था से जुड़े देवादित्य सिन्हा और पत्रकार शिवकुमार उपाध्याय ने मुख्यमंत्री से मिल कर मांग की थी कि वन्य जीवों के संरक्षण के लिए वन एवं वनों के आसपास सभी निर्माण पर तुंरत रोक लगाई जाय. इन्होंने प्राचीन वन भूमि पर किए गए कब्जे को हटा कर दोषियों पर कार्रवाई करने और मामले की सीबीआई जांच कराने की भी मांग की थी. ताकि, वन भूमि पर अवैध कब्जा करने के साथ प्लॉटिंग के काम में लगे लोगों और कंपनियों का खुलासा हो सके. लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया.

सरकारी उपेक्षा और प्रशासनिक मिलीभगत का नतीजा है कि दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों और भालुओं वाले मड़िहान के जंगल की पहचान मिटती जा रही है. इसी जंगल के देवरी इलाके में वेलेस्पन पावर एनर्जी की ओर से 1320 मेगावाट की बिजली परियोजना प्रस्तावित है, जो पूरी तरह से विवादों में घिरी है. वेलेस्पन के खिलाफ राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में याचिका भी दायर की गई है. कंपनी ने ग्रामीणों की जमीन को औने-पौने दामों पर दलालों और दबंगों के माध्यम से हथियाने का काम भी शुरू कर दिया है, जिसमें कंपनी को पुलिस और प्रशासन का साथ मिल रहा है. विडंबना ये है कि मड़िहान के जंगल से लगे रोड एसएच-5 के किनारे के वन को काट कर मुलायम सिंह यादव विश्वविद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ, वन क्षेत्र उजाड़ कर वहां साइन सिटी विंडम, माउंटेन सिटी हेवन, स्पेजियो स्मार्ट सिटी बसाने की भी तैयारी चल रही है. कल तक जहां हरे भरे वनों की घनी हरियाली देखने को मिलती थी, आज वहां ‘यहां प्लॉट बिकाऊ है’ के बड़े-बड़े बोर्ड लगे दिखते हैं.

वेलेस्पन पावर एनर्जी से होने वाले नुकसान को लेकर आंदोलन करते चले आ रहे विंध्य बचाओ अभियान के कार्यकर्ता देवादित्य सिन्हा कहते हैं कि कंपनी के लोग गुंडागर्दी पर उतर आए हैं. पिछले 19 जून को एक कार्यक्रम में भाग लेने जाते समय जंगल में रास्ता भटक जाने के दौरान संस्था के सदस्यों को कंपनी के लोगों और मड़िहान पुलिस ने मिल कर प्रताड़ित किया और कैमरे वगैरह लूट लिए. कंपनियों के गुंडे दबंगई के बल पर लोगों को दबाने का काम कर रहे हैं. विंध्यक्षेत्र के जंगलों, खासकर मड़िहान क्षेत्र के जंगलों को बचाने के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मिर्जापुर स्थित दक्षिणी परिसर के शिक्षकों एवं छात्रों द्वारा भी अभियान चलाया जा रहा है. इसके अलावा पर्यावरण और वन संरक्षण के मसलों पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में याचिकाएं भी दायर की गई हैं. इसके बावजूद पूरा तंत्र निर्लज्जता और धृष्टता से भ्रष्ट आचरण में लगा हुआ है.

Vindhya Bachao Desk
Author: Vindhya Bachao DeskEmail: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
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