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साधारण नाम: गोह / बंगाल मॉनिटर / Large Bengal Monitor Lizard / Common Indian monitor / Bengal monitor

वैज्ञानिक नाम: Varanus bengalensis

भौगोलिक सीमा: 

  • पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ पूर्वी ईरान, अफग़ानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश और बर्मा में नदी घाटियों में पाए जाते हैं। 
  • उप-प्रजाति, क्लाउड मॉनिटर (Clouded monitor) दक्षिणी बर्मा, वियतनाम, कंबोडिया, थाईलैंड, मलेशिया, सुमात्रा, जावा और सुंडा द्वीपों में पाये जाते हैं। 

आवास: 

  • गोह सूखे-अर्ध शुष्क रेगिस्तानी इलाकों में तथा बाढ़, झाड़-झंखाड़ और नम जंगल में भी पाए जाते हैं। 
  • वे अक्सर कृषि क्षेत्रों के आस पास देखे जा सकते हैं। 

भौतिक विशेषताएँ / पहचान: 

  • लंबाई: 61-175 सेमी
  • वजन: अधिकतम 7.2 किलोग्राम
  • नर आम तौर पर मादाओं से बड़े होते हैं। 
  • वयस्क गोह आम तौर पर भूरे या हरे-भूरे रंग के होते हैं, जिनपर काले / धुंधले धारियाँ मुंह से पूंछ तक होते हैं। 
  • युवा गोह दूसरे वयस्क गोह के मुकाबले में ज़्यादा रंग बिरंगे होते हैं। 
  • युवा गोह की गर्दन, गले और पीठ पर काले धब्बे एवं आड़े तिरछे धारियाँ होती हैं। 
  • उनका पेट सफेद होता है जिसपर काले धारियों के साथ-साथ पीले और धूसर (ग्रे) रंग के धब्बे भी होते हैं।
Bengal Monitor
गोह (फोटो : विंध्य बचाओ)

भोजन की आदत:

  • गोह मांसाहारी होते हैं जो कचरे में पड़े मृत जानवरों को भी खाते हैं। 
  • उनके विशिष्ट आहार में कीड़े तथा उनके बच्चे (लार्वा) , बिच्छू, घोंघे, चींटियाँ और अन्य अकशेरुकी (बिना रीढ़ की हड्डी वाले जानवर) को भी खाते हैं। 
  • मेंढक, मछली, छिपकली, सांप, कृन्तकों और ज़मीन पर रहने वाले पक्षियों को भी खाते हैं। 
  • गोह झींगुर तथा गोबर में रहने वाले कीड़ों को भी खाते हैं। 

प्रजनन: 

  • गोह एक बहुपत्नी जीव हैं माने कि पुरुषों और महिलाओं दोनों के कई साझेदार रहते हैं। 
  • प्रजनन का मुख्यतः जून से सितंबर तक होता है हालांकि, नर अप्रैल से ही इसके लिए लड़ना शुरू कर देते हैं। 
  • मादा ज़मीन में गड्ढे कर के घोंसला बनाती हैं उसमे अंडे को रख कर अपने थूथन के मदद से भर देती हैं। 
  • मादा अक्सर अपने असली घोंसले के आस-पास कई नकली घोंसले खोदती हैं। 
  • मादा एक बार में लगभग 20 अंडे देती है। 
  • युवा जन्म के बाद से ही स्वतंत्र हो जाते हैं और लगभग 2.5-3 वर्ष की आयु से प्रजनन शुरू करते हैं। 

जीवनकाल:  लगभग 22 वर्ष 

व्यवहार: 

  • गोह शर्मीले होते हैं तथा एकान्त में एवं मनुष्यों से दूर रहना पसंद करते हैं। 
  • गोह आमतौर पर ज़मीन पर पाए जाते हैं लेकिन वे पेड़ों पर भी चढ़ सकते हैं। 
  • शिकारियों से बचने के लिए बच्चे अक्सर पेड़ों पर चढ़ जाते हैं वहीं वयस्क गोह ज़मीन पर ही भागना पसंद करते हैं। 
  • गोह शिकार पर नज़र रखने के लिए तथा अन्य नर गोह से लड़ने के लिए अपने पिछले पैरों पर खड़े होते हैं। 
  • गोह दिनचर प्राणी है जो रात में सोते हैं और सुबह 6 बजे के आसपास सक्रिय हो जाते हैं। 
  • गोह मगरमच्छ की तरह ही सुबह में धूप में लेट कर अपना शरीर सेंकते हैं। 
  • वे अपना सीमा क्षेत्र का निर्धारण नहीं करते हैं इसलिए मौसम के अनुसार भोजन की उपलब्धता के आधार पर अपनी सीमा बदल सकते हैं। 
  • गोह अपनी पैनी नज़र से लगभग 250 मीटर दूर से मानव हलचल का पता लगा सकते हैं।
  • कभी कभी गोह, मनुष्यों द्वारा परेशान होने अथवा पकड़े जाने पर काट भी सकते हैं। 

पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका: 

  • बंगाल मॉनिटर जिन पारिस्थितिकी प्रणालियों में रहते हैं वहाँ वास करने वाले दूसरे कई छोटे जानवरों का शिकार कर उनकी आबादी को नियंत्रित करते हैं। 
  • गोह के बच्चे स्थानीय शिकारियों जैसे कि अजगर, शिकारी पक्षी, नेवला, जंगली कुत्ते और अन्य बड़े गोह के लिए महत्त्वपूर्ण शिकार हैं। 

संरक्षण स्थिति: 

  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के जून 2009 के आकलन के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों की "रेड डाटा सूची" / लाल सूची में इसे "संकटमुक्त (Least Concern या LC)" श्रेणी में रखा गया है। 
  • गोह को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसूची I के तहत संरक्षित किया गया है। 
  • IUCN रेड लिस्ट तथा अन्य स्रोत गोह के कुल जनसंख्या का विवरण प्रदान नहीं करते हैं हालांकि इसकी जनसंख्या निरंतर घट रही है। 
  • गोह का शिकार उसके चमड़े, माँस, वसा (चर्बी) के लिए होता है।
  • कभी-कभी लोग डर कर गोह को मार देते हैं।

स्रोत: 

  • http://animalia.bio/bengal-monitor
  • https://animaldiversity.org/accounts/Varanus_bengalensis/
  • https://www.iucnredlist.org/species/164579/5909661